अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आयोजित ‘दधीचि अंगदान संकल्प अभियान’ के गरिमामय कार्यक्रम में सेवा, समर्पण एवं अंगदान के महत्व पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।*
कार्यक्रम के अंतर्गत रामकृष्ण मिशन, हरिद्वार के सचिव स्वामी दयामृतानन्द ने सारस्वत उद्बोधन देते हुए कहा कि मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य परोपकार और लोकमंगल है। महर्षि दधीचि का त्याग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो हमें अपने जीवन को समाज और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी व्यक्ति के जीवन का अंत नहीं, बल्कि अनेक लोगों के लिए नए जीवन का आरंभ बन सकता है।
इसके उपरांत उत्तराखंड सरकार के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने अपने उद्बोधन में कहा कि दधीचि अंगदान संकल्प अभियान समाज में जन-जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने अधिकाधिक लोगों से इस पुनीत अभियान से जुड़कर अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया तथा कहा कि सेवा और संवेदना ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आयोजन से जुड़े सभी अतिथियों, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के व्यापक सहयोग से ही अंगदान के इस राष्ट्रीय अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।
इस अवसर पर उपस्थित माननीय अतिथियों ने अंगदान संकल्प के लिए लोगों को प्रेरित किया तथा अभियान से संबंधित प्रकाशन का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, शिक्षाविद्, गायत्री परिवार के कार्यकर्ता, विश्वविद्यालय परिवार एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

